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बाबाजान के उद्धरण
प्रेम हमारा कर्तव्य है
सलात मोमिनीन की मेराज है
सलात हुज़ुर-ए-कल्ब के बगैर नहीं होती
इस्लाह-ए-नफ़्स और करब-ए -ईलाही पाने के लिए सलात कायम करो
जिसे अल्लाह की ज़ात-ए-मुबारका पर कामिल यकीन होजाता है वो जावेद होजाता है. यानि उसे मौत नहीं आती
अल्लाह की ज़ात पर यकीन ना हो तो फ़रिशतों सी इबादत भी मायने नहिं रखती
जब इंसान पैदा होता है तो उस्की ज़िन्दगी का कठिन सफ़र शुरु होजाता है. इस सफ़र में आसानी होगी अगर बन्दा हर लम्हा खालिक को पेश-ए-नज़र रखे
मुरीद की रुहानी तरक़्की का ज़ीना अदब है
अहल-ए-शरीयत की इबादत - शरीयत के मुताबिक इबादत व अमल और उस के नसब के मुताबिक आकिबत पाना
अहल-ए-तरीकत का शेवा - अल्लाह कि खुश्नुदी के लिए अमल करना और उस के रंग में रंग जाना ताके उस्का दीदार होजाए
कुरान रहे पेश-ए-नज़र यह है शरियत - अल्लाह रहे पेश-ए-नज़र यह है तरिकत
नज़र मर्कूज़-ए-हक़ पर रखना बंदगी है - बस अपने आप को पहचान लेना ज़िंदगी है
कुफ़्र के बाद बड़ा गुनाह दिल अज़ारी है
इंसान को अल्लाह की दी हुई हर चीज़ के लिए इंसान को शुक्रगुज़ार होना चाहिए. हमें शरीर के हर हिस्से और हर सांस के लिए आभारी होना चाहिए